मिडिल और लोवर क्लास के लोग Lenskart के चश्मे न खरीदे क्यों।

मिडिल और लोवर क्लास के लोग Lenskart के चश्मे न खरीदे क्यों।  जानने के लिए इस लेख को ध्यान से पढ़ें


अगर आप मिडिल क्लास या लोअर क्लास के व्यक्ति है तो आप lenskart से चश्मा न खरीदे क्योंकि वहां पर आप आप फंस सकते है क्योंकि मेरा खुद का एक्सपीरियंस है जब आप वहां चश्मा लेने जाएंगे तब सबसे पहले आपकी आंखों का टेस्ट किया जाएगा, और इस तरह से किया जाएगा कि जैसे आपकी आंखों की सबसे ज्यादा परवाह उनको ही है। वहां पर पहले मेरी आंखों का टेस्ट किया गया। उसके बाद मेरा चश्मा बनाया गया, और दूर और दोनों का चश्मा एक ही चश्मे में बनवाया था। जब वो चश्मा बन कर आया तो उस चश्मे मुझे धुंधला दिखाई दिया। तब वो लोग मुझे समझाने लगे कि आपको अगर दूर देखना है तो आप अपनी आंखों की आई बॉल को थोड़ा उठा कर देखो, और अगर पास की चीज देखना चाहते हो तो अपनी गर्दन को नीचे झुकाकर देखो। इससे आपको ठीक से दिखाई देगा। 

अब मेरा कहना है कि अगर जब भी कोई आदमी देखता है तो वो हमेशा गर्दन को उठा कर या गर्दन झुकाकर ही देखता है। और चश्मा बनवाने के बाद भी अगर हमको इतनी मेहनत करनी पड़ेगी देखने के लिए तो फिर progressive लैंस बनवाने का क्या फायदा है। इससे बढ़िया तो आप अलग अलग लेंस का चश्मा बनवा ले। जो इनके महंगे वाले चश्मे है वो कैसे है इसका मुझे नहीं पता है। क्या पता वो ठीक भी हो। लेकिन जो चश्मे सस्ते है वो तो एकदम बेकार है। बेकार में lenskart के स्टोर के चक्कर काटने पढ़ेंगे तो क्या फायदा है। 

इसलिए lenskart सिर्फ उन लोगों के लिए ही है  जो अमीर है। गरीबों के लिए तो lenskart बेकार ही है। 

वैसे भी गरीबों को पैसे कमाने के लिए इतनी मेहनत करनी होती है। और वो लोग अपना काम काज छोड़ कर lenskart के ही चक्कर काटते रहेंगे। 

कम्पनी के लिए सिर्फ एक ही सुझाव है कि अगर आप कोई चश्मा बना रहे है और सस्ता चश्मा बना रहे है तो आप ऐसा चश्मा बनाए जिससे कि लोगो को सुविधा हो ना कि असुविधा हो। क्योंकि इस तरह का चश्मा बनाने से आप गरीब लोगों की पहुँच से दूर हो रहे है। अगर आप ऐसा चश्मा नहीं बना सकते है। तो आप लोगो को चश्मे में देखने की प्रैक्टिस करने की सय भी न दे। लोग आपके यहाँ चश्मा लेने आते हैं राय लेने नहीं।

लोग जैसा चश्मा चाहते है। बस आप वैसा ही चश्मा बनायेगे तो आपकी कम्पनी के लिए ठीक होगा। अन्यथा अभी तक तो आप बेकार ही चश्मे बना रहे है। इससे आपकी बढ़िया इमेज भी खराब हो रही है और आपको करोडो रूपयों का घाटा भी हो रहा है। अगर आप गरीब लोगों को ही अपनी कम्पनी से नही जोड पाए तो बिजनेस का क्या फायदा। आप गरीब लोगो पर ज्यादा ध्यान देगे तो आपकी कम्पनी को बहुत फायदा होगा। बाकि पीयूष बंसल जी आप खुद समझदार है।

जब भी लोग कोई चीज खरीदने जाते है तो वो हमेशा चाहते है कि हमे बार बार दुकान न जाना पड़े और हमारा काम एक ही बार में हो जाए। लेकिन जब उसे एक बार भी अपना काम छोड़कर जाना पड़ता है तो उसे बड़ी परेशानी और निराशा होती है कि हमे पैसे खर्च करके भी जाना पड रहा है। यह कैसी दुकान या स्टोर है जो अपने कस्टमर सतुष्ट भी नहीं कर सकता है। बस फिर अगली बार वो वहाँ जाने से पहले सोचता है और दूसरे लोगों को भी कहता है कि वहाँ सोच समझ कर ही जाना। बस इससे उस दुकान, कम्पनी या स्टोर की मार्किट कितनी खराब होती है।

अन्त में यही कहना चाहूँगा कि आप अपने प्रोडेक्ट में सुधार करें अपनी सर्विस में सुधार करें जिससे कि आपकी मार्किट वैल्यू बनी रहे और आपकी कम्पनी की कमाई में बढ़ोतरी हो। 

धन्यवाद



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